एसआरएन रेप केस मामले में सीएमओ के खिलाफ दर्ज हो एफ आई आर : ऋचा‌ सिंह

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प्रयागराज।[मनोज पांडेय] कुछ दिन पूर्व स्वरूप रानी अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान मिर्जापुर की बेटी पूजा मोदनवाल के साथ हुए रेप के कारण आज पीड़िता की अस्पताल में ही मौत हो गई। इस मामले में पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ईवीवी, वर्तमान सपा नेत्री डॉक्टर रिचा सिंह व मंजू पाठक के नेतृत्व में तमाम महिलाओं ने डीएम कार्यालय पर धरना दिया।
उनका कहना है कि बार-बार कहने पर भी एफ.आई.आर. न दर्ज करना, यहां तक कि जीडी में मामला दर्ज न करना, इस बात को प्रदर्शित करता है कि पुलिस प्रशासन और सीएमओ प्रयागराज केस को रफा-दफा करने पर आमादा थे। सीएमओ ने हर संभव कोशिश की एफ.आई.आर. दर्ज ना होने पाए, इसके लिये पुलिस को अवैधानिक रिपोर्ट द्वारा गुमराह किया। सवाल उठता है कि जब मामला जीडी में भी दर्ज नहीं था और लड़की की शिकायत पुलिस प्रशासन इलाहाबाद से थी तो बगैर जीडी में दर्ज किए पुलिस प्रशासन सीएमओ को मेडिकल कमेटी बनाने के लिए कह ही नहीं सकती थी, फिर कमेटी किस के आदेश पर बनी यह बड़े संदेह को जन्म देता है।
इसका मतलब सीएमओ ने अपने आप मेडिकल कमेटी का निर्माण कर दिया व साजिश के तहत फर्जी सबूत तैयार किए जिससे कि केस रफा-दफा हो सके। जब एफ.आई.आर नहीं तो लड़की की कोई भी मेडिकल रिपोर्ट व बयान सब विधि-विहीन है। अब परिवार द्वारा आशंका जताई जा रही है कि साजिश के तहत सीएमओ प्रयागराज और पुलिस प्रशासन ने मिलकर उसकी मृत्यु का इंतजार किया, जिससे कि लड़की बयान न दे सके और मामले की सच्चाई सामने ना आ सके।
अब आवश्यकता है केस को रफा-दफा करने, फर्जी सबूत तैयार करने और सबूतों को मिटाने के आरोप में सीएमओ के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज हो‌ और उनके खिलाफ विधिक कार्यवाही करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया जाए। संबंधित पुलिस अधिकारी चिन्हित किए जाएं और यह तय हो कि एफ.आई.आर. दर्ज न करने के पीछे कौन सी ताकतें काम कर रही थी। उन्हें भी चिन्हित किया जाए और उन्हें दंडित करने की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाए।


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